अमेरिका ने भारत को इंटिग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम बेचने को मंजूरी दी

अमेरिका की सरकार ने भारत को एकीकृत वायु रक्षा हथियार प्रणाली (Integrated Air Defence Weapon System – IADWS) की बिक्री को मंजूरी दे दी है. अमेरिका ने 1.9 बिलियन अमरीकी डॉलर (लगभग 13,000 करोड़ रुपये) के इस सौदे को मंजूरी दी है. इससे पहले, अमेरिकी सरकार ने उस समय अपनी नाराजगी व्यक्त की थी जब भारत ने रूस के साथ पांच अरब डॉलर (लगभग 35000 करोड़ रुपये) में पांच एस-400 वायु रक्षा प्रणाली खरीदने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे.

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भारत यात्रा के दौरान इस सौदे पर हस्ताक्षर किये जा सकते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 23-26 फरवरी, 2020 को भारत की यात्रा पर आएंगे.

यह भी पढ़ें: जानें पेट्रोल पम्प खोलने की पूरी प्रक्रिया क्या होती है?

लाभ
• भारत अपने रक्षा बलों को आधुनिक बनाने के लिए अमेरिका से एकीकृत वायु रक्षा हथियार प्रणाली (IADWS) खरीदना चाहता है.
• इससे भारतीय सेना को हवाई हमले की स्थिति में तुरंत करवाई करने में मदद मिलेगी.
• अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि भारत अपने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए नई तकनीक का उपयोग करना चाहता है और हवाई हमले के खतरे से बचने के लिए अपनी मौजूदा वायु रक्षा प्रणाली का विस्तार करना चाहता है.
• एकीकृत वायु रक्षा हथियार प्रणाली (IADWS) में वायु रक्षा हथियार प्रणाली, AMRAAM मिसाइल, NASAMS-II, सतह से हवा में मिसाइल, रडार, आदि शामिल हैं.

एकीकृत वायु रक्षा हथियार प्रणाली
इसमें पांच एएन / एमपीक्यू -64 एफ 1 सेंटिनल रडार सिस्टम, 118 एएमआरएएएम -120 सी -7 / सी -8 मिसाइल, तीन एएमआरएएएम गाइडेंस सेक्शन, चार एएमआरएएएम कंट्रोल सेक्शन और 134 स्टिंगर एफआईएम -92 मिसाइल शामिल हैं. इसमें 32 M4 A1 राइफल, मल्टी-स्पेक्ट्रल टारगेटिंग सिस्टम-मॉडल A भी शामिल है.

भारत की स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली
डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) कई स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली जैसे आकाश Mk1 और आकाश Mk1S भी विकसित कर रहा है. आकाश Mk1 पहले ही चालू हो चुका है जबकि DRDO दूसरे पर शोध कर रहा है.
DRDO एक अन्य स्वदेशी रूप से विकसित कम ऊंचाई वाले इंटरसेप्टर क्विक रिएक्शन सरफेस-टू-एयर मिसाइल (QRMAM) पर भी काम कर रहा है. यह मिसाइल ट्रायल अवस्था में है. भारतीय सेना इजरायल की सतह से हवा में पायथन डिब्री (SPYDer) प्रणाली का भी उपयोग कर रही है. यह इजरायली प्रणाली कम ऊंचाई व मध्यम दूरी के खतरों के लिए उपयोगी है.

यह भी पढ़ें: एक भारत श्रेष्ठ भारत अभियान शुरू: जानें इसके बारे में सबकुछ

Leave a Comment