डॉ वीरेंद्र कुमार खटीक वर्तमान प्रोटेम स्पीकर: जीवनी और राजनीतिक कैरियर

भारत सरकार ने बीजेपी सांसद डॉ. वीरेंद्र कुमार खटिक को 17वीं लोकसभा प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया है. यहीं आपको बता दें कि 17 और 18 जून को प्रोटेम स्पीकर के द्वारा नवनिर्वाचित सांसदों को शपथ दिलाई जाएगी. वीरेंद्र कुमार लगभग 7 साल से सांसद हैं और दलित समुदाय से आते हैं.

Dr. Virendra Kumar Khatik Biography and Political Career

भारत की संसद में लोकसभा, राज्य सभा और भारत के राष्ट्रपति शामिल हैं. 17वीं लोकसभा की रचना प्रगति पर है. अब सरकार लोकसभा सत्र को शुरू करने के लिए आवश्यक अधिकारियों की नियुक्ति कर रही है. इसके लिए पहली पोस्ट को प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति कहा जाता है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ सीट से सांसद डॉ। वीरेंद्र कुमार 17 वीं लोकसभा के प्रोटेम स्पीकर हैं.

17 जून से 26 जुलाई तक 17वीं लोकसभा का पहला सत्र होगा. लोकसभा का 17 जून को सत्र शुरू होने के बाद दो दिनों तक नवनिर्वाचित सांसदों को शपथ दिलाई जाएगी. लोकसभा अध्यक्ष का चयन 19 जून को किया जाएगा. आइये जानते हैं कि वीरेंद्र कुमार कौन हैं, कहा के सांसद रह चुके हैं, उनका राजनितिक सफर, इत्यादि.

डॉ. वीरेंद्र कुमार खटिक के बारे में
जन्म: 27 फरवरी 1954
जन्म स्थान: सागर, मध्य प्रदेश, भारत
पिता का नाम: अमर सिंह
माता का नाम: सुमत रानी
जीवन संगी: कमल वीरेंद्र
बच्चे: 1 पुत्र व 3 पुत्रियां
राष्ट्रीयता: भारतीय
राजनीतिक दल: भारतीय जनता पार्टी
शैक्षिक और व्यावसायिक योग्यता: एम.ए. (अर्थशास्त्र ), पीएच.डी. (बाल श्रम) डॉ0 हरिसिंह गौड़ विश्वाविद्यालय, सागर, मध्यत प्रदेश से शिक्षा ग्रहण की
उच्चतम योग्यता: पीएच.डी.
निर्वाचन क्षेत्र : टीकमगढ़ (SC) (मध्य. प्रदेश)
व्यवसाय: सामाजिक कार्यकर्ता

डॉ. वीरेंद्र कुमार का बचपन संघर्षो के दौर से गुजरा है, बचपन से लेकर कॉलेज की पढ़ाई उन्होंने संघर्षों के साथ पूरी की है. जब वे कक्षा 5 में थे उन्होंने अपने पिता के साथ साइकिल की दुकान पर बैठना शुरु कर दिया था. आपको हैरानी होगी जानकर कि कक्षा 5वीं से लेकर कॉलेज तक की पढ़ाई उन्होंने इसी साइकिल की दुकान पर काम करते हुए पूरी की है. वे शुरू से आरएसएस से जुड़े रहे हैं. उन्होंने विद्यार्थी परिषद्, विहिप और पार्टी के विभिन्न पदों पर रहकर कार्य किया, वह प्रदेश के अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष भी रहे है.

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वीरेंद्र कुमार का राजनीतिक सफर

डॉ. वीरेंद्र कुमार ने अपने करियर की शुरुआत 1977-79 में मध्य प्रदेश के जिला सागर से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (A.B.V.P.) के संयोजक के रूप में की. बाद में उन्हें 1996 में सागर निर्वाचन क्षेत्र से 11वीं लोकसभा के लिए चुना गया. उन्होंने 1996-2009 के बीच मध्य प्रदेश के सागर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया. 1996 से 2009 तक सागर से चार बार सांसद रहे. 2004 तक सागर सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी. 2009 में यह सीट सामान्य श्रेणी में आ गई, तब वीरेंद्र कुमार सागर छोड़कर टीकमगढ़ आ गए थे. वीरेंद्र कुमार मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ निर्वाचन क्षेत्र से 17वीं लोकसभा के लिए चुने गए हैं.

वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय में महिला और बाल विकास मंत्रालय (मेनका गांधी की अध्यक्षता में) और राज्य मंत्री थे.

प्रोटेम स्पीकर कौन होता है?

प्रोटेम स्पीकर उन्हें कहा जाता है, जो चुनाव के बाद पहले सत्र में स्थायी अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष का चुनाव होने तक संसद या विधानसभा का संचालन करते हैं. लोकसभा में सबसे अधिक समय गुजारने वाले सदस्य या निर्वाचित सबसे वरिष्ठ सदस्य को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया जाता है. संसदीय मामलों के मंत्रालय के माध्यम से सत्तारूढ़ पार्टी या गठबंधन प्रोटेम स्पीकर का नाम राष्ट्रपति के पास भेजता है. इसके बाद राष्ट्रपति प्रोटेम स्पीकर को नियुक्त करते हैं, जो नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाता है.

अध्यक्ष का पद लोकसभा की पहली बैठक के तुरंत बाद तक जारी रहता है, जब तक कि वह निर्वाचित नहीं हो जाता या जब तक कि वह संविधान के अनुच्छेद 94, 101 और 102 में निर्दिष्ट किसी भी कारण से सदस्य ना रहे.

तो अब आप जान गए होंगे डॉ. वीरेंद्र कुमार 17वीं लोक सभा के प्रोटेम स्पीकर है और उन्होंने अपने जीवन में काफी संघर्ष किया है.

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