जानिये नेशनल हेराल्ड केस क्या है?

National Herald Building

नेशनल हेराल्ड अख़बार के बारे में;

नेशनल हेराल्ड नामक अंग्रेजी अख़बार की स्थापना जवाहर लाल नेहरू ने 1938 में की थी. इस अख़बार का मालिकाना हक़ एसोसिएट्स जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) के पास था.  यह अख़बार 2 अप्रैल 2008 में छपना बंद हो गया था.  लेकिन नेशनल हेराल्ड अख़बार की कमर्शियल प्रॉपर्टी कई शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, भोपाल, लखनऊ, इंदौर और पंचकुला में है. अख़बार बंद होते ही अन्य तरह के बिज़नेस जैसे; ऑफिस, शॉपिंग मॉल, रेस्टोरेंट या फिर बहुमंजिला इमारतें चल रहे हैं जिनसे हर महीने लाखों का किराया मिल रहा है.

राहुल और सोनिया की कंपनी यंग इंडियन के बारे में;

कोर्ट में याचिकाकर्ता सुब्रमण्यम स्वामी ने बताया है कि कांग्रेस ने एसोसिएट्स जर्नल्स लिमिटेड- एजेएल का अधिग्रहण करने के लिए 23 नवम्बर 2010 को 5 लाख रुपये की पूँजी से यंग इंडियन नाम की एक गैर लाभकारी कंपनी बनायीं. इस कंपनी में सोनिया और राहुल दोनों की हिस्सेदारी 38%- 38% है जबकि बाकी की हिस्सेदारी मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फ़र्नान्डिस की है.

directors young indian company

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सोनिया और राहुल पर क्या आरोप हैं?

सोनिया और राहुल पर मुख्य आरोप यह है कि इन्होंने यंग इंडियन नाम की एक नॉन प्रोफिताबल कंपनी बनायीं और उस कंपनी (एसोसिएट्स जर्नल्स लिमिटेड- एजेएल) का अधिग्रहण कर लिया जो कि लाभ के उद्येश्य के लिए बनायीं गयी थी. जब यंग इंडियन ने एजेएल का अधिग्रहण किया उस समय एजेएल पर 90 करोड़ रुपये की देनदारी थी इन देनदारियों को चुकाने के लिए कांग्रेस ने एजेएल को 26 फरवरी 2011 को बिना ब्याज का 90 करोड़ का लोन दिया और बदले में एजेएल ने अपने 99 प्रतिशत शेयर ‘यंग इंडियन’ को ट्रान्सफर कर दिए थे.

अर्थात एजेएल के 10-10 रुपये के 9 करोड़ शेयर ‘यंग इंडियन’ को दे दिए गए जिससे यंग इंडियन को इस कंपनी के 99 फीसदी शेयर हासिल हो गए हैं.

अब यंग इंडियन को कांग्रेस पार्टी का लोन चुकाना था इसलिए यंग इंडियन ने कांग्रेस का लोन चुकाने के लिए 50 लाख का पेमेंट किया और बाकी का लोन कांग्रेस ने माफ़ कर दिया. यानि कि अब एजेएल पर मालिकाना हक़ राहुल और सोनिया की यंग इंडियन कंपनी का हो गया था. ध्यान रहे कि जब एजेएल का अधिग्रहण को हुआ था उस समय एजेएल के चेयरमैन मोतीलाल वोरा थे.

इस पूरे प्रकरण में एजेएल कम्पनी के 99% शेयर सिर्फ 1% लोगों को मिल गए जो कि पहले 761 शेयरहोल्डर लोगों के पास थे. इन 761 लोगों में फिरोज गाँधी, इंदिरा गाँधी राहुल गाँधी घनश्याम दास बिडला, मार्कंडेय काटजू के पिता कैलाश नाथ काटजू ,विजय लक्ष्मी पंडित, माधव राव सिंधिया जैसे बड़े नाम शामिल थे.

इस प्रकार ऊपर दिए गए विवरण से स्पष्ट है कि राहुल गाँधी की यंग इंडियन कंपनी ने केवल 50 लाख रुपये का भुगतान करके एजेएल की 2000 करोड़ रुपये की संपत्ति पर कब्ज़ा कर लिया है.

अब यहाँ पर शक इस बात को लेकर भी उठ रहा हैं कि कांग्रेस ने ऐसी कंपनी को लोन क्यों दिया जिसके (एजेएल) पास खुद ही लगभग 2000 करोड़ की संपत्ति है.

इस मामले में आरोपियों के खिलाफ के खिलाफ किन-किन धाराओं में मामला दर्ज किया गया है;

1. IPC की धारा 420: यह धारा धोखाधड़ी से सम्बंधित है जिसमें अधिकतम सजा 7 साल हो सकती है.

2. IPC की धारा 403: यह धारा बेईमानी से संपत्ति हथियाने से सम्बंधित है जिसमें अधिकतम सजा 2 साल हो सकती है.

3. IPC की धारा 406: यह धारा “विश्वास का आपराधिक हनन” से सम्बंधित है जिसमें अधिकतम सजा 3 साल सो सकती है

4. IPC की धारा 120: यह धारा आप्रशिक साजिश से जुडी हुई है इसमें अपराध के अनुसार सजा का प्रावधान है.

इस पूरे मामले ने कांग्रेस पार्टी ने इतना जबाब दिया कि यंग इंडियन को केवल चैरिटी के उद्येश्य से बनाया गया था और उसे इस मामले में कोई लाभ नहीं मिला है. कांग्रेस पार्टी ने यह भी दावा किया कि शेयरों के ट्रान्सफर में कोई घोटाला नहीं हुआ है और यह केवल एक ‘वाणिज्यिक लेनदेन” था. पार्टी ने इस मामले को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा है कि सुब्रमण्यम स्वामी बीजेपी सरकार में मंत्री हैं इसलिए यह मामला घोटाला नहीं बल्कि कांग्रेस के खिलाफ एक राजनीतिक साजिश है.

फ़िलहाल क्या सच है इस बात का फैसला कोर्ट के ऊपर छोड़ देना चाहिए. हमारा उद्येश्य आपको इस पूरे मामले से अवगत कराना था उम्मीद है कि हमारा यह प्रयास सफल हुआ होगा.

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